प्रारंभिक जीवन और करियर
मार्क गर्टलर, जो मानव आकृतियों, चित्रों और स्थिर जीवन (still-life) के चित्रण के लिए प्रसिद्ध एक ब्रिटिश चित्रकार थे, उनका जन्म 9 दिसंबर, 1891 को लंदन के स्पिटलफील्ड्स में हुआ था। उनका प्रारंभिक जीवन और
डोरा कैरिंगटन के साथ उनका प्रेम संबंध गिल्बर्ट कैनन के उपन्यास 'मेंडल' के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। 1896 में, जब उनका परिवार उनके पिता के साथ लंदन में रहने लगा, तो उनके नाम को "मार्क्स" से बदलकर अंग्रेजी शैली में "मार्क" कर दिया गया। गर्टलर में कम उम्र से ही चित्रकारी की अद्भुत प्रतिभा के संकेत दिखने लगे थे। उन्होंने 1906 में
रीजेंट स्ट्रीट पॉलिटेक्निक में कला की कक्षाओं में प्रवेश लिया, लेकिन गरीबी के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। 1908 में, पॉलिटेक्निक में शाम की कक्षाएं जारी रखते हुए, उन्होंने
क्लेटन एंड बेल नामक एक रंगीन कांच (stained glass) कंपनी में प्रशिक्षु के रूप में काम करना शुरू किया।
प्रसिद्धि का उदय और उल्लेखनीय कृतियाँ
गर्टलर के करियर को तब नई उड़ान मिली जब 1908 में एक राष्ट्रीय कला प्रतियोगिता में उन्हें तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने लंदन के
स्लेड स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लिया, जहाँ वे पॉल नैश, एडवर्ड वाड्सवर्थ और सर स्टेनली स्पेंसर जैसे उल्लेखनीय कलाकारों के समकालीन बने। गर्टलर के संरक्षकों में लेडी ओटोलिन मोरेल भी शामिल थीं, जिन्होंने उन्हें कैम्डेन टाउन समूह के नेता वॉल्टर सिकर्ट से परिचित कराया। समाज के उच्च वर्ग के चित्रों के निर्माता के रूप में उनकी सफलता अल्पकालिक रही, क्योंकि उनके स्वभाव की उग्रता और अपनी दृष्टि के अनुसार कला को आगे बढ़ाने के प्रति उनके अटूट समर्पण ने अंततः उन्हें व्यक्तिगत हताशा और गरीबी की ओर धकेल दिया।
विरासत और अंतिम विश्राम
गर्टलर का जीवन गरीबी और अधूरे प्रेम के संघर्षों से भरा रहा। 23 जून, 1939 को उनका निधन हो गया और उन्हें
विल्सडेन यहूदी कब्रिस्तान में दफनाया गया, जहाँ लंदन क्षेत्र की कई अन्य उल्लेखनीय हस्तियों को भी समाधि दी गई है।
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