Self Portrait with Monkey
Acrylic On Canvas
WallArt
Surrealism
1940
55.0 x 44.0 cm
गिक्ली / आर्ट प्रिंट
तेज़ उत्पादन और विभिन्न फिनिश विकल्पों के साथ म्यूजियम-क्वालिटी गिकली (giclée) या कैनवस प्रिंट। ( हाथ से बनी पेंटिंग पर स्विच करें
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100% पैसे वापसी की गारंटी
थोक छूट का लाभ
Self Portrait with Monkey
गिक्ली / आर्ट प्रिंट
प्रतिकृति का आकार
-
कुल देय राशि
$ 64
संग्रहणीय वस्तु का विवरण
Self Portrait with Monkey – A Window Into Frida Kahlo’s Soul
Frida Kahlo's "Self Portrait with Monkey," painted in 1940, transcends mere representation; it embodies the artist’s profound introspection and unwavering connection to Mexican folklore. Measuring 55 x 44 cm on masonite, this artwork isn’t simply a depiction of a woman gazing at the viewer—it's an embodiment of Kahlo’s psychological landscape rendered in vibrant hues and imbued with symbolic depth. The painting immediately draws attention to Kahlo herself, positioned centrally against a backdrop of lush foliage that speaks volumes about resilience and rebirth. Her gaze is direct, unflinching, conveying both vulnerability and determination – qualities central to Kahlo's artistic persona.- Style: Kahlo’s distinctive primitivism style—influenced by Mexican folk art traditions—is evident in the bold simplification of forms and the expressive use of color. The artist deliberately eschewed academic conventions, prioritizing emotional honesty over technical precision.
- Technique: Executed with oil paints on masonite, “Self Portrait with Monkey” showcases Kahlo’s meticulous brushwork, layering pigments to achieve a textured surface that captures the essence of her subject matter. The careful blending of colors contributes to an overall atmosphere of melancholy and contemplation.
- Symbolism: The thorn necklace symbolizes Christ’s crown of thorns, representing sacrifice and suffering – themes recurrent throughout Kahlo's oeuvre. Simultaneously, it underscores the artist’s unwavering spirit in the face of adversity.
- Historical Context: Painted during a period marked by Kahlo’s divorce from Diego Rivera and her exploration of bisexuality, “Self Portrait with Monkey” captures the artist’s emotional turmoil—a reflection of the broader societal anxieties surrounding gender roles and sexuality during the mid-20th century.
संबद्ध कलाकृतियाँ
कलाकार का जीवन परिचय
फ्राविदा काहलो: पीड़ा और जुनून की एक जीवनगाथा
फ्राविदा काहलो, मैक्सिको की महानतम कलाकारों में से एक, का जन्म 6 जुलाई 1907 को कोयोआकन, मेक्सिको सिटी में हुआ था। उनका जीवन शारीरिक पीड़ा और भावनात्मक उथल-पुथल से भरा रहा, जिसने उनकी कला को गहराई से प्रभावित किया। उनके पिता, गुइलेर्मो काहलो, एक जर्मन-मैक्सिकन फोटोग्राफर थे जिन्होंने फ्राविदा के भीतर कलात्मक प्रतिभा को पहचाना और प्रोत्साहित किया। बचपन में ही उन्हें पोलियो हो गया था, जिससे उनका शरीर कमजोर हो गया, लेकिन इसने उन्हें अपनी आंतरिक दुनिया की खोज करने और अपने अनुभवों को कला के माध्यम से व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। 1925 में एक भयानक बस दुर्घटना ने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। इस दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इसी दौरान उन्होंने चित्रकला को अपना लिया, जो उनकी पीड़ा और अकेलेपन का सहारा बन गया।आत्म-चित्रणों की दुनिया: पहचान और पीड़ा का प्रतिबिंब
फ्राविदा काहलो ने आत्म-चित्रणों पर विशेष ध्यान दिया, जिनमें उन्होंने अपनी शारीरिक और भावनात्मक पीड़ा को दर्शाया। उनके चित्रों में अक्सर प्रतीकात्मक तत्व शामिल होते हैं जो उनकी आंतरिक भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करते हैं। 'द टू फ्रिडास' (1939) उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है, जिसमें उन्होंने अपने दोहरे व्यक्तित्व को दर्शाया है - एक यूरोपीय और एक मैक्सिकन। यह चित्र उनके विवाह के बाद की भावनात्मक उथल-पुथल का प्रतीक है। इसी तरह, 'सेल्फ-पोर्ट्रेट विथ थॉर्न नेकलेस एंड हमिंगबर्ड' (1940) में, उन्होंने अपनी पीड़ा को कांटेदार माला और दुर्भाग्यपूर्ण बिल्ली के माध्यम से दर्शाया है, जबकि हमिंगबर्ड आशा और लचीलापन का प्रतीक है। उनके चित्रों में शरीर की भंगुरता, दर्द और मृत्यु जैसे विषयों को साहसपूर्वक चित्रित किया गया है, जो उन्हें अन्य कलाकारों से अलग करते हैं। फ्राविदा ने अपनी कला के माध्यम से न केवल व्यक्तिगत पीड़ा को व्यक्त किया, बल्कि महिलाओं के अनुभवों और सामाजिक मुद्दों पर भी प्रकाश डाला।प्रभाव और विकास: मैक्सिकन संस्कृति का उत्सव
फ्राविदा काहलो की कला पर मैक्सिकन लोक कला, यूरोपीय पुनर्जागरण चित्रकला और आधुनिकतावादी आंदोलनों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने अपनी कला में चमकीले रंगों, नाटकीय प्रतीकों और पारंपरिक मैक्सिकन रूपांकनों का उपयोग किया। उनके पति, डिएगो रिवेरा, एक प्रसिद्ध मैक्सिकन भित्तिचित्र कलाकार थे, जिन्होंने उनकी कलात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फ्राविदा ने डिएगो से प्रेरणा ली और अपनी अनूठी शैली विकसित की जो मैक्सिकन संस्कृति और आधुनिक कला के तत्वों को जोड़ती है। उन्होंने अपने चित्रों में मैक्सिकन पहचान, नारीत्व और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को उठाया। फ्राविदा काहलो की कला न केवल व्यक्तिगत अनुभवों का प्रतिबिंब है, बल्कि मैक्सिकन संस्कृति और इतिहास का भी उत्सव है।ऐतिहासिक महत्व: एक सांस्कृतिक प्रतीक
फ्राविदा काहलो की कला ने 20वीं शताब्दी में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। उन्हें मैक्सिको के सबसे महान कलाकारों में से एक माना जाता है और उनकी कृतियाँ दुनिया भर के संग्रहालयों में प्रदर्शित होती हैं। फ्राविदा काहलो न केवल एक कलाकार थीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आइकन भी थीं जिन्होंने पारंपरिक लिंग भूमिकाओं को चुनौती दी और महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उनकी कला ने नारीवादी आंदोलन को प्रेरित किया और उन्हें दुनिया भर की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनाया। फ्राविदा काहलो की विरासत आज भी जीवित है, और उनकी कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने अपनी पीड़ा को शक्ति में बदल दिया और एक ऐसी कलात्मक विरासत छोड़ी जो हमेशा याद रखी जाएगी। फ्राविदा काहलो की कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में चुनौतियों का सामना करते हुए भी सुंदरता और अर्थ खोजा जा सकता है।फ्रिडा काहलो
1907 - 1954 , मेक्सिको
मुख्य तथ्य
- कलात्मक शैली: अति यथार्थवाद, लोक कला
- जन्म तिथि: 6 जुलाई 1907
- जन्म स्थान: कोयोआकैन, मेक्सिको सिटी, मेक्सिको
- पूरा नाम: मैगडालेना कार्मेन फ्रिदा काहलो वाई कैल्डेरोन
- प्रभावित आंदोलन:
- चिकानो कला
- नारीवादी कलाकार
- प्रभावित कलाकार:
- मेक्सिकन लोक कलाकार
- यूरोपीय पुनर्जागरण चित्रकार
- प्रमुख कृतियाँ:
- दो फ्रिदा
- कांटे की माला के साथ स्व-चित्रित
- टूटा हुआ स्तंभ
- हेनरी फोर्ड अस्पताल
- मृत्यु तिथि: 13 जुलाई 1954
- राष्ट्रीयता: मेक्सिकन

ग्लास का विकल्प केवल 110 सेमी से कम आकार में ही उपलब्ध है।
