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गिक्ली / आर्ट प्रिंट
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कुल देय राशि
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संग्रहणीय वस्तु का विवरण
विक्टर वासरेली: ज्यामिति का एक क्रांतिकारी कलाकार
विक्टर वासरेली (1906-1997) आधुनिक कला के इतिहास में एक अद्वितीय नाम हैं। हंगरी के पेक्स शहर में पैदा हुए इस कलाकार ने प्रारंभिक जीवन में चिकित्सा की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन जल्द ही उन्हें दृश्य अभिव्यक्ति का आकर्षण मिला और उन्होंने 1927 में बोर्टनिक अकादमी में कला के लिए अपनी रुचि समर्पित कर दी। वासरेली के शुरुआती वर्षों ने उन्हें ज्यामिति और डिजाइन के प्रति एक गहरी प्रेरणा दी जो बाद में उनके सिग्नेचर शैली को आकार देने वाली थी। Bauhaus आंदोलन से प्रभावित अकादमी में प्रवेश करने के बाद, वासरेली ने कार्यात्मक डिजाइन के सिद्धांतों को आत्मसात किया और ज्यामितीय अमूर्तता को अपनाया - ये तत्व उनके कलात्मक दृष्टिकोण के आधार बन गए।
वासरेली का कार्य ऑप आर्ट (Optical Art) के विकास में महत्वपूर्ण था। यह शैली 1960 के दशक में उभरी थी और इसका उद्देश्य दर्शकों की धारणा को भ्रमित करना था। वासरेली ने इस शैली को अपने कलात्मक प्रयासों में सफलतापूर्वक उपयोग किया, जिसमें जटिल ज्यामितीय पैटर्न और रंगीन आकार शामिल थे जो एक आकर्षक दृश्य अनुभव प्रदान करते थे। उनके काम ने ऑप्टिकल इल्यूजन के सिद्धांतों का उपयोग करके कलात्मक अभिव्यक्ति के नए रास्ते खोले। वासरेली के ऑप आर्ट के कार्यों को अक्सर शांत और संतुलित माना जाता है, लेकिन उनमें एक गतिशील ऊर्जा भी होती है जो दर्शकों को आश्चर्यचकित करती है।
लভা: ज्यामितीय पैटर्न की सुंदरता
वासरेली के सबसे प्रसिद्ध चित्रों में से एक "लভা" है। यह चित्र एक जीवंत रंगीन ज्यामितीय पैटर्न का प्रतिनिधित्व करता है जो लैंप या कैलिप्टोस्कोप जैसा दिखता है। पेंटिंग में लाल, नीले, हरे, पीले, बैंगनी, नारंगी और गुलाबी सहित कई रंगों का उपयोग किया गया है। पैटर्न के केंद्र में एक बड़ा गोला होता है जिसके चारों ओर छोटे गोले होते हैं, जो एक जटिल और आकर्षक डिज़ाइन बनाते हैं। ज्यामितीय आकार जैसे वृत्त, वर्ग और त्रिकोण पैटर्न को एक साथ जोड़ते हैं ताकि समग्र रूप से लैंप जैसा प्रभाव पैदा हो सके। वासरेली ने अपने चित्रों में रंगों का उपयोग सावधानीपूर्वक किया और उन्हें एक सामंजस्यपूर्ण तरीके से व्यवस्थित किया।
शैली और तकनीक: वासरेली का विशिष्ट दृष्टिकोण
वासरेली की कलात्मक शैली को ज्यामितीय अमूर्तता के सिद्धांतों द्वारा परिभाषित किया गया है। उन्होंने अपने चित्रों में सरल आकार और रंग का उपयोग करके जटिल पैटर्न बनाने पर जोर दिया। वासरेली ने एक अद्वितीय प्रणाली विकसित की जिसमें प्रत्येक आकृति को एक निश्चित स्थान पर रखा जाता था और रंगों को एक विशिष्ट क्रम में व्यवस्थित किया जाता था। इस प्रणाली ने कलात्मक अभिव्यक्ति को एक नई दिशा दी और वासरेली को ऑप आर्ट के लिए एक शक्तिशाली उपकरण प्रदान किया। वासरेली का मानना था कि ज्यामिति सौंदर्य और संतुलन दोनों को प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका है।
इतिहास और प्रतीकवाद: वासरेली की विरासत
वासरेली के काम को आधुनिक कला के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। ऑप आर्ट के विकास में उनके योगदान ने कलात्मक विचारों को चुनौती दी और दर्शकों को नए अनुभवों के लिए प्रेरित किया। वासरेली के चित्रों में ज्यामितीय पैटर्न और रंगीन आकार का उपयोग करके सौंदर्य और संतुलन की भावना पैदा करने का प्रयास किया गया था। इन तत्वों को एक साथ जोड़कर वासरेली ने कलात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक शक्तिशाली माध्यम बनाया जो आज भी कलाकारों को вдохновляет। वासरेली का काम कला इतिहास में एक स्थायी विरासत छोड़ गया है और ऑप आर्ट के सिद्धांतों को आधुनिक डिजाइन में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संबद्ध कलाकृतियाँ
कलाकार का जीवन परिचय
विक्टर वासरेली: भ्रम और ज्यामिति का जादूगर
१९०६ में पेच, क्रोएशिया (जो उस समय ऑस्ट्रिया-हंगरी का हिस्सा था) में जन्मे विक्टर वासरेली, जिन्हें मूल रूप से ग्योज़ो वासार्हेली के नाम से जाना जाता था, आधुनिक कला के इतिहास में एक अद्वितीय स्थान रखते हैं। वे ऑप्टिकल आर्ट (Op Art) और गतिज कला (Kinetic Art) के अग्रणी थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से हमारी देखने की क्षमता को चुनौती दी। वासरेली का जीवन चिकित्सा के अध्ययन से कलात्मक खोज तक एक असाधारण यात्रा थी, जो ज्यामितीय अमूर्तता और दृश्य भ्रमों के प्रति उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने न केवल कलात्मक सीमाओं को तोड़ा, बल्कि यह भी दिखाया कि कैसे गणितीय सिद्धांतों और वैज्ञानिक समझ का उपयोग करके सौंदर्यपूर्ण रूप से मनमोहक रचनाएँ बनाई जा सकती हैं। उनका काम आज भी दुनिया भर में प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है, जो हमें दृश्य अनुभव की जटिलताओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
प्रारंभिक जीवन और प्रभाव: Bauhaus का साया
वासरेली ने शुरूआती शिक्षा चिकित्सा के क्षेत्र में ली थी, लेकिन कला के प्रति उनके जुनून ने उन्हें बुडापेस्ट के पोडोलिनी-वोल्कमैन अकादमी में चित्रकला का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उनका सबसे महत्वपूर्ण अनुभव सैंडोर बोर्टनिक के कार्यशाला – मुहेले (Műhely) में आया, जो Bauhaus आंदोलन से गहराई से प्रभावित था। इस कार्यशाला ने उन्हें कार्यात्मक डिजाइन और ज्यामितीय अमूर्तता के सिद्धांतों को समझने में मदद की, जिसने उनके बाद के काम को आकार दिया। उन्होंने पियट मोंड्रियन और काज़िमिर मालेविच जैसे कलाकारों से प्रेरणा ली, लेकिन केवल उनकी शैली की नकल करने के बजाय, वासरेली ने एक ऐसी गतिशील कला बनाने का प्रयास किया जो दर्शक की धारणा को सक्रिय रूप से संलग्न करे। १९३० में पेरिस जाने के बाद, उन्होंने ग्राफिक डिजाइन और विज्ञापन में काम करते हुए अपनी कलात्मक कौशल को निखाराया, और धीरे-धीरे अपने विशिष्ट शैली का विकास किया।
ऑप्टिकल आर्ट का जन्म: भ्रम का विज्ञान
१९६० के दशक तक, विक्टर वासरेली ऑप्टिकल आर्ट आंदोलन के प्रमुख व्यक्ति बन गए। उन्होंने अपनी रचनाओं में एक व्यवस्थित पद्धति का उपयोग किया, ज्यामितीय आकृतियों और रंगों को इस तरह से व्यवस्थित किया कि वे दृश्य भ्रम पैदा करते थे - जैसे गति का आभास, गहराई या कंपन। यह कोई धोखा नहीं था; बल्कि, यह धारणा की अंतर्निहित गतिशीलता को उजागर करने का प्रयास था। वासरेली ने कला को लोकतांत्रिक बनाने के लिए पुनरुत्पादन और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों को अपनाया, जिससे यह संग्रहालयों और दीर्घाओं से परे भी पहुंच योग्य हो गई। उन्होंने दर्शकों को अपनी दृश्य अनुभव पर सवाल उठाने और अर्थ के निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उनकी रचनाएँ न केवल सौंदर्यपूर्ण रूप से मनमोहक थीं, बल्कि वे वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित थीं, जो उन्हें कलात्मक अभिव्यक्ति का एक अनूठा उदाहरण बनाती हैं।
गतिज कला और विरासत: कला का विस्तार
वासरेली की कलात्मक खोज स्थिर भ्रमों तक ही सीमित नहीं थी। उन्होंने गतिज कला के क्षेत्र में भी प्रवेश किया, ऐसी रचनाएँ बनाईं जो वास्तविक गति को शामिल करती थीं या दृश्य प्रभावों के माध्यम से गति का आभास देती थीं। “जॉर्जेस पोम्पिडो” (१९७६), जो पेरिस के सेंटर पोम्पिडो पर स्थापित एक बड़ी गतिमान वस्तु है, इस महत्वाकांक्षा का प्रमाण है - कला और वास्तुकला का एकीकरण जो शहरी डिजाइन के पैमाने पर होता है। उन्होंने रोसेन्थल चीनी मिट्टी के बरतन के साथ अपने सहयोग के माध्यम से वाणिज्यिक उत्पादों में भी अपनी डिजाइनों को लागू किया, जिसके परिणामस्वरूप प्रतिष्ठित “सुओमी” टेबलवेयर श्रृंखला सामने आई। यह सीमाओं को धुंधला करने की उनकी इच्छा ने कला और लोकप्रिय संस्कृति के बीच एक स्थायी छाप छोड़ी है। उन्होंने फाउंडेशन वासरेली की स्थापना करके अपने कार्यों के संरक्षण और प्रचार को सुनिश्चित किया, और १९८२ में फ्रेंच-सोवियत अंतरिक्ष यान सल्यूट ७ पर उनके सीरोग्राफ्स को शामिल करना उनकी कला की वैश्विक मान्यता का प्रतीक था।
ऐतिहासिक महत्व: आधुनिकतावादी दृष्टि
वासरेली का कला इतिहास में योगदान बहुआयामी है। उन्होंने पारंपरिक चित्रकला तकनीकों से परे जाकर ऐसी रचनाएँ बनाईं जो दर्शक की धारणा को सक्रिय रूप से संलग्न करती हैं। उनकी व्यवस्थित दृष्टिकोण ने कलात्मक रचनात्मकता के पारंपरिक विचारों को चुनौती दी और कंप्यूटर-जनित कला और डिजिटल डिजाइन का मार्ग प्रशस्त किया। पुनरुत्पादन और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों को अपनाकर, वासरेली ने ललित कला और लोकप्रिय संस्कृति के बीच की सीमाओं को धुंधला कर दिया, जिससे दोनों पर एक स्थायी प्रभाव पड़ा। उन्होंने न केवल सौंदर्यपूर्ण रूप से मनभावन वस्तुएँ बनाईं, बल्कि दृश्य अनुभव के बारे में मौलिक सत्य प्रकट करने वाले दृश्य प्रयोग भी किए। उनकी रचनाएँ आज भी हमें ज्यामिति की सुंदरता, अमूर्तता की शक्ति और मानव रचनात्मकता की अनंत संभावनाओं की याद दिलाती हैं। वासरेली वास्तव में एक दूरदर्शी थे जिन्होंने हमारी कला को देखने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया.
विक्टर वासरेली
1906 - 1997 , क्रोएशिया
मुख्य तथ्य
- कलात्मक शैली: ऑप आर्ट, गतिज कला
- जन्म तिथि: 9 अप्रैल 1906
- जन्म स्थान: पेक्स, क्रोएशिया
- पूरा नाम: विक्टर वासरेली
- प्रभावित आंदोलन:
- ग्राफिक डिजाइन
- आंतरिक डिजाइन
- प्रभावित कलाकार:
- पीट मोंड्रियान
- काजिमीर मालेविच
- प्रमुख कलाकृतियाँ:
- ब्लू स्टडी
- ग्रीन स्टडी
- ज़ेबरा
- मृत्यु तिथि: 15 मार्च 1997
- राष्ट्रीयता: हंगेरियन-फ्रांसीसी


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